उत्तरी कोरिया ने अमरीका के साथ बातचीत में परमाणु निरस्त्रीकरण पर किसी तरह की चर्चा न करने का फ़ैसला किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ में उत्तरी कोरिया के स्थायी दूत किम सूंग ने यह सूचना दी। किम सूंग ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि अमरीका से बातचीत की प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की सद्भावना सामने नहीं आयी है, कहा कि वाशिंग्टन का वार्ता प्रक्रिया को लंबा खींचने के पीछे, अमरीका में आगामी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए समय हासिल करना लक्ष्य था।
उत्तरी कोरिया का अमरीका के साथ बाचतीत में परमाणु निरस्त्रीकरण के विषय पर किसी तरह की बातचीत न करने का फ़ैसला यह दर्शाता है कि प्यूंग यांग को अमरीका के ग़ैर क़ानूनी व एकपक्षीय व्यवहार पर आपत्ति है और वह वार्ता प्रक्रिया की ओर से हताश है।
दोनों देशों के बीच वार्ता प्रक्रिया शुरु होने के लगभग 20 महीने तथा दोनों देशों राष्ट्राध्यक्षों के बीच 3 मुलाक़ात के बाद ज़मीनी सच्चाई इस वार्ता प्रक्रिया की ओर से प्यूंग यांग की हताशा को दर्शाती है। इस बातचीत में यह तय पाया था कि उत्तरी कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के मार्ग पर आगे बढ़ने पर अमरीका उत्तरी कोरिया को सुरक्षा गैरंटी देने के साथ साथ इस देश के ख़िलाफ़ पाबंदियों को स्थगित और फिर अंत में उसे ख़त्म कर देगा। इस बीच उत्तरी कोरिया ने अपना एक परमाणु परीक्षण केन्द्र तोड़ डाला और किसी भी तरह के परमाणु परीक्षण और अंतरमहाद्विपीय मीज़ाईल टेस्ट पर रोक लगा रखी थी लेकिन सामने वाले पक्ष से उसे शत्रुतापूर्ण रवैये के सिवा कुछ नहीं मिला।
ऐसे हालात में उत्तरी कोरिया ने अमरीका को 2019 के अंत तक का समय दिया है कि वह अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करे। उत्तरी कोरिया के अधिकारियों ने पछले कुछ हफ़्तों के दौरान कई बार यह धमकी दी है कि 2019 ख़त्म होते ही वे नई योजना पर काम करेंगे और मुमकिन है वे पिछले रास्ते पर लौट जाएं।
उत्तरी कोरिया का अमरीका के साथ वार्ता की मेज़ पर परमाणु निरस्त्रीकरण के विषय पर बात न करने का फ़ैसला अमरीका की मौजूदा सरकार को चेतावनी है। उत्तरी कोरिया का यह फ़ैसला इस अर्थ में है कि दोनों पक्ष अपने पिछले वाले रवैये की ओर पलट रहे हैं और अमरीका की ओर से वादाख़िलाफ़ी की वजह से दोनों देशों के बीच वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला।